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The Biharijanseva : मिल्लत कॉलेज दरभंगा में डॉ. भीम राव अम्बेडकर जयंती पर संभाषण एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

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मिल्लत कॉलेज, दरभंगा के आई.क्यू.ए.सी., एन.एस.एस तथा राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीम राव अम्बेडकर जयंती के अवसर पर संभाषण एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन प्राचार्य डॉक्टर डॉ. सिद्धार्थ शंकर सिंह के संरक्षण में किया गया। उर्दू विभाग के वरिय स. प्राध्यापक डॉ. शाहनवाज़ आलम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. अम्बेडकर जी का जीवन गरीबी और कठिनाइयों के साथ व्यतीत हुआ है। उनके संघर्ष और शिक्षा का ही परिणाम है कि भारतीय संविधान समतामूलक समाज निर्माण के लिए श्रेयस्कर है। हिंदी विभाग के डॉ. मुन्ना साह ने डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक न्याय का सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व की भावना भारतीय समाज के लिए सर्वोपरि है। डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के द्वारा समाज में सभी लोगों को बराबरी का अधिकार, सोचने, बोलने और निर्णय लेने की स्वतंत्रता, समाज में भाईचारा आदि के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। महाविद्यालय के बर्सर व राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. जमशेद आलम ने कहा कि शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जो इसे पिएगा, वह दहाड़ेगा, डॉ. अम्बेडकर की इस उक्ति से हमे सीखना चाहिए तथा शिक्षा और संघर्ष के द्वारा अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहिए। दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. सोनी शर्मा ने कहा कि सामाजिक अस्पृश्यता, ऊंच- नीच की मानसिकता से पीड़ित डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के माध्यम से सामाजिक वैमनस्य की भावना से हमें मुक्त किया साथ ही सम्मानित जीवन जीने के लिए बहुत सारे अधिकार दिए। उनके जीवन से हमे सीखना चाहिए और कभी हार न मानते हुए अपने लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष करते रहना चाहिए। मैथिली विभाग के डॉ. विजय शंकर पंडित ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघर्ष का कोई विकल्प नहीं है। समाज में कोई भी व्यक्ति यदि बड़े ओहदे को प्राप्त किया है तो उसके पीछे वर्षों का संघर्ष ही है। उक्त कार्यक्रम में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में कुल पंद्रह प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें प्रथम स्थान नूरजबीन, द्वितीय स्थान निगार फातमा, तृतीय स्थान मुस्कान खातून ने प्राप्त किया। संभाषण प्रतियोगिता में कुल दस प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें प्रथम स्थान निगार फातमा, द्वितीय स्थान शायमा परवीन तथा तृतीय स्थान सल्तनत अंजुम ने प्राप्त किया। निर्णायक मण्डल में डॉ. कीर्ति चौरसिया, डॉ. वीरेंद्र कुमार मिश्रा, डॉ. सुभाष कुमार, डॉ. निशा कुमारी ने अहम भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम का संचालन आई.क्यू.ए.सी समन्वयक एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम पदाधिकारी एवं मनोविज्ञान विभाग की वरिय स. प्राध्यापक डॉ. कीर्ति चौरसिया ने किया। डॉ. अमृता प्रियदर्शिनी, डॉ. बासेरा बरक़ीब, डॉ. जिलानी, डॉ. अब्दुर राफ़े, डॉ. जावेद अख्तर एवं छात्र छात्राओं ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया।

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