नई दिल्ली, 13 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यमुना विहार दिल्ली विभाग द्वारा भीमराव अम्बेडकर कॉलेज में “युवा कुम्भ” का आयोजन किया गया। युवा कुंभ के माध्यम से सेवा, संगठन, संस्कार एवं विकसित भारत में युवाओं की भूमिका के महत्व पर प्रकाश डालना इसका मुख्य उद्देश्य था। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद को भी सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हरीश जी ने कहा कि छात्राओं की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति,विविधता में एकता का प्रतीक थी। सकारात्मक ऊर्जा से परिवर्तन लाने का नाम युवा है। जीवन के चार पुरुषार्थ की चर्चा करते हुए संस्कार व गुरुकुल के महत्व को बताया। उन्होंने मैकाले की शिक्षा पद्धति की आलोचना की तथा डॉ. हेडगेवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने डाक्टरेट की पढ़ाई करने के वावजूद भी राष्ट्र सेवा को चुना। उन्होंने समाज में विकृतियों को खत्म करने हेतु अनेक कार्य किए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक जीवन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 1 लाख 29 हज़ार सेवाकार्य चल रहे है। भारत विभाजन के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा किए गए कार्यो का उल्लेख किया तथा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह उत्कृष्ट विचारक थे। उनकी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनकी पुस्तक हिंदुइज्म की चर्चा करते हुए कहे कि उन्होंने उसमें कम्युनिस्टों की आलोचना की है। उनकी दृष्टि में हिंदुत्व का स्थान उच्च रहा है। अपने व्यक्तिगत जीवन में पंचपरिवर्तन का अनुसरण करें। उन्होंने इस मौके पर भाषा व भोजन के विषय पर भी प्रकाश डाला। इस मौके पर छात्रों ने अनेक प्रश्न भी किए।
विकास डोगरा जी एवं संजीव जी ने आज युवा कुम्भ के मौके पर कहा कि मुझे अपना छात्र जीवन याद आगया। आज युवाओं को इस युवा कुम्भ कि बेहद जरूरत है। संघ से शताब्दी वर्ष में युवाओं को जोड़ने का यह अभियान है। पंचपरिवर्तन की दिशा में सहयोग के लिए उन्होंने सबका आहवान किया। कार्यक्रम की शुरूआत सर्व प्रथम सरस्वती बन्दना से हुई जिसमें कल्चरल सोसायटी की छात्रा ने नृत्य प्रस्तुत किया। हिंदी पत्रकारिता विभाग की छात्रा दिया कुमारी ने बंदे मातृभूमि जगजननी गीत का गायन किया। वहीं अन्य छात्राओं ने मेरी चौखट पर श्री राम आएंगे पर हरियाणवी नृत्य प्रस्तुत किया। उत्तराखण्ड की एक छात्रा ने महा नंदा देवी नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद गणेश बंदना पर छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर प्रो शशि रानी जी, संजीव जी के साथ अन्य विद्वान, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।

