Headlines

The Biharijanseva : शिक्षा से भारत विकसित राष्ट्र बनेगा – रविन्द्र सिंह इंद्राज

Spread the love

नई दिल्ली, 13 अप्रैल। डॉ. भीमराव अम्बेडकर कॉलेज में डॉ अम्बेडकर और सामाजिक समरसता विषय पर 20वां बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री रविन्द्र सिंह इंद्राज ने सभी को 136वें जयंती की शुभकामनाएं दी। इंद्राज जी ने कहा कि अगर किसी देश का संविधान न हो तो देश का अस्तित्व नहीं है। उनको पढ़ कर नहीं जाना जा सकता अपितु उनको जानने के लिए अनुभूति करना होगा। वह महामानव थे। प्रतिभा को किसी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में दबाया नहीं जा सकता वह सूर्य की तरह चमकेगा। इस मौके पर कॉलेज की वार्षिक पत्रिका चेतना का लोकार्पण किया गया।

विशिष्ट अतिथि धोड़ा के विधायक अजय माहवर ने कहा कि बाबा साहब के संविधान निर्माण के माध्यम से देश व सरकार चलती हैं। बाबा साहब का जीवन हम सब के लिए प्रेरणा दायी है। उनके सामने बहुत दिकते आयी पर उन्होंने घुटने नहीं टेका मन छोटा नहीं किया। अपने विचार व शिक्षा से आत्मविश्वास को सुदृण किया। आज बाबा साहब के कारण भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। उन्होंने गीता जैसा पवित्र संविधान का निर्माण किया। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पंच तीर्थ बना कर बाबा साहब को सच्ची श्राद्धजली दी।
इस मौके पर डाक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माण, संविधान पाठ, पीपीटी निर्माण और वीडियो निर्माण आदि प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विशिष्ट अतिथि उत्तर पूर्वी दिल्ली की एसडीएम पूनम जी की गरिमामयी उपस्थि थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की प्रो मंजू मुकुल कांबले ने कहा कि बाबा साहब में आर्थिक विज़न था। उन्होंने कहा कि बम्बई में बहिष्कृत जन हितकारिणी सभा की स्थापना उन्होंने की जिसका मिशन था, शिक्षा को बढ़ावा देना। महार सत्याग्रह किया उसी समय उन्होंने मुकनायक अख़बार का प्रकाशन भी शुरू किया था। क्यों कि उनको लगता था कि अख़बार के माध्यम से बात जनमानस तक जाएगी। उनकी सम्पादकीय टीम में सभी वर्गों के लोग थे। काम्बले ने उनके द्वारा प्रकाशित अख़बार मुकनायक, बहिष्कृत भारत, समता, जनता, प्रबुद्ध भारत और जाति का विनाश, श्रुद्र कौन थे, अछूत कौन और कैसे, रुपये की समस्या : इसका उद्गम और समाधान, भारत में जातियाँ: उनकी उत्पत्ति, यंत्रणा और विकास, बौद्ध धर्म और उसका धम्म, पुस्तकों का जिक्र किया। हू वाज शूद्र नाम की पुस्तक का जिक्र किया और कहा कि दलित स्मिता को समझने केलिए यह महत्वपूर्ण पुस्तक है। अन्त में उन्होंने कहा की बाबा साहब की करुणा ने मानवता को समझने का दायरा बदल दिया।
प्रो कौशल पवार ने कहा बाबा साहब की जयंती मनाई जारही है। बाबा साहब सिंबल ऑफ नॉलेज कहा गया जो उस समय के वैश्विक विश्विद्यालयों में अपनी डिग्री हासिल किया, उन विश्विद्यालयों की लाइब्रेरी में उनकी प्रतिमा स्थापित किया गया। वर्तमान समय में महिला आरक्षण बिल की चर्चा हो रही है उसका जिक्र बाबा साहब ने उस समय किया था। भारत की हर महिला को बाबा साहब का कर्जदार होना चाहिए अगर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बात की जाए तो उसमें भी उनका योगदान है। समाजिक समरस्ता तबतक अधूरी है जबतक शैक्षणिक संथाओ में सामाजिक समरस्ता लागू न किया जाए। आज भारत इस लिए विश्व गुरू बन रहा है क्यों कि उसके पीछे हमारे पुरखों का बलिदान है। बाबा साहब का मजाक उड़ाने वाले छात्रों के बीच जब बाबा साहब योग्यता लेकर आए होंगे तो क्या चित्र रहा होगा। बाबा साहब अपने मन मे कोई कलुषता नहीं रखते थे। इस तरह उन्होंने बाबा साहब की शैक्षिक कहानियों को सुनाया जो प्रेरणा के स्रोत हो सकते हैं। उनकी जयंती हमे समरसता व सद्भाव का संदेश देती है, बाबा साहब एक ग्लोबल लीडर हैं। पवार ने बाबा साहब के बारे में उन्होंने कहा कि उनका योगदान न भूतों न भविष्यति कह कर अपनी बात समाप्त की। आयोजन का संचालन प्रो दीपाली जैन ने किया धन्यवाद ज्ञापन प्रो शशि रानी ने किया।
इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो राजेश उपध्याय, डॉ अरुण प्रताप सिंह, बीबीई विभाग की निशा, वंशिका, डॉ. मंजू शर्मा, डॉ.विनीत कुमार, डॉ.आदर्श कुमार मिश्र, डॉ. अखिलेश, डॉ. सरोज, डॉ.सुभाष गौतम, डॉ. प्रवीण झा, डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. अनु चौहान, डॉ. राकेश कुमार पांडेय, हरिकृष्ण जाखड़ आदि शिक्षकों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Top