The Biharijanseva : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, दिल्ली दूरदर्शन कार्यालय पर एनएसयूआई के गुंडो द्वारा की गई तोड़फोड़ एवं हिंसक हमले जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की कड़ी निंदा करता है, यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और दूरदर्शन जैसी सरकारी एवं सार्वजनिक संस्था के बाहर इस प्रकार का विरोध प्रदर्शन न केवल व्यवस्था को बाधित करता है, बल्कि संस्थाओं की गरिमा और कार्यप्रणाली को भी प्रभावित करता है। सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना और अराजकता फैलाना किसी भी छात्र संगठन के लिए उचित नहीं ठहराया जा सकता।
ध्यातव्य हो कि दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव जी ने एक टीवी शो के दौरान वीर सावरकर पर अभद्र टीका टिप्पणी करने वाले प्रवक्ता को जवाब दिया था जिसके विरोध में आज दिल्ली स्थित दूरदर्शन कार्यालय के बाहर एनएसयूआई ने एक आंदोलन का आह्वान किया था जो कि कुछ ही देर में हिंसक हो गया और दूरदर्शन कार्यालय के बाहर तोड़फोड़ की गई तथा कर्मचारियों से हाथापाई की गई। अभाविप इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता है और इसे छात्र राजनीति के गिरते स्तर का प्रतीक मानता है। विद्यार्थी परिषद सदैव संवाद, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर अपनी बात रखने में विश्वास करता है।
पिछले कई महीनो में एनएसयूआई लगातार हिंसक प्रदर्शन करती रहती है। भारत मंडपम दिल्ली में AI Summit का विरोध, राजस्थान यूनिवर्सिटी में की गई तोड़फोड़ या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ ऑफिस में की गई तोड़फोड़ हो यह सब कृत्य एनएसयूआई की अमानवीय एवं हिंसक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
अभाविप दिल्ली प्रदेश मंत्री श्री सार्थक शर्मा ने कहा कि एनएसयूआई की मूल प्रवृति शुरू से ही हिंसक रही है। समय समय पर एनएसयूआई अपने आकाओं को खुश करने के लिए इस प्रकार के कुकृत्य करती रहती है। दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान पर हमला करना अत्यंत घृणित और निंदनीय कृत्य है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है, बल्कि राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति असम्मान को भी दर्शाता है।
अभाविप दिल्ली पुलिस से यह मांग करती है कि इस घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। यूपीए सरकार के दौरान भी कई बार दूरदर्शन जैसी संस्था के पत्रकारों पर सेंसरशीप और हमले जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती रही है यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

