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वस्त्र हमारी मूलभूत आवश्यकता, जिसके दान से हमारे अंदर दया, सहानुभूति एवं परोपकार की भावना होती है विकसित- डॉ अरविन्द

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भारतीय संस्कृति में वस्त्रदान अत्यंत पुण्य एवं श्रेष्ठ कार्य जो मानवता, करुणा एवं सह-अस्तित्व का प्रतीक- डॉ चौरसिया

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित बी.एड. (नियमित) की एनएसएस इकाई द्वारा आज जरुरतमंदों के लिए वस्त्र-वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने कहा कि विभाग समय-समय पर समाजसेवा उन्मुखी कार्यक्रम आयोजित करता रहता है, ताकि युवाओं में संवेदनशीलता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना का भी विकास हो। उन्होंने कहा कि वस्त्र हमारी मूलभूत आवश्यकता है। इसके दान से हमारे अंदर दया, सहानुभूति तथा परोपकार की भावना विकसित होती है। यह हमें दूसरों के दुःख को समझने और सहायता करने के लिए प्रेरित करता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं में सेवा की भावना का विकास करता है। भारतीय संस्कृति में वस्त्र दान अत्यंत पुण्य एवं श्रेष्ठ कार्य माना जाता है। यह मानवता, करुणा एवं सह-अस्तित्व का प्रतीक है। जब हम जरूरतमंदों को दान देते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान आती है जो हमें आत्मिक सुख एवं संतोष प्रदान करता है। ‌कहा कि बीएड (नियमित) के छात्र-छात्राएं ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहते हैं जो सराहनीय एवं अनुकरणीय है। आज का वस्त्र-वितरण कार्यक्रम इसी का एक हिस्सा है। एनएसएस पदाधिकारी डॉ उदय कुमार ने बताया कि दान हेतु वस्त्र एवं बिस्कुट आदि का संग्रह विभाग के शिक्षक- शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं के साथ ही अन्य लोगों से स्वयंसेवकों द्वारा दान स्वरूप प्राप्त किया गया।
प्रारंभ में डॉ आर एन चौरसिया एवं डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने हरी झंडी दिखाकर छात्र-छात्राओं को निर्धारित स्थानों के लिए रवाना किया। छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक गण ने दान के लिए वस्त्र एवं छोटे बच्चों के लिए बिस्कुट का पैकेट भी दिया गया था। एनएसएस पदाधिकारी डॉ उदय कुमार के नेतृत्व में वस्त्र-वितरण कार्यक्रम मुख्य रूप से शनि मंदिर, दरभंगा रेलवे स्टेशन एवं श्यामा माई मंदिर परिसर में किया गया। साथ ही रास्ते में मिले जरुरतमंदों को भी वस्त्र एवं बच्चों को बिस्किट बांटे गए।
इस अवसर पर विभाग के शिक्षक डॉ शम्भू प्रसाद, डॉ अखिलेश मिश्र, डॉ शगुफ्ताह जबीं, डॉ निधि वत्स, डॉ शुभ्रा, डॉ कुमारी स्वर्णरेखा, डॉ उदय कुमार, कुमार सत्यम, डॉ मिर्ज़ा रूहुल्लाह बेग, गोविन्द कुमार, डॉ जय शंकर सिंह, डॉ रेशमा तबस्सुम, शिक्षकेत्तर कर्मी सीमा झा, अशोक चौधरी, संजय कुमार एवं बीएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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