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जिज्ञासा फाउंडेशन ने महिला आरक्षण विधेयक किया गहन मंथन

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The Biharijanseva : नई दिल्ली । समाज के प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रबुद्ध जनों के संगठन ‘जिज्ञासा’ द्वारा आज एकात्म मानव भवन, दिल्ली में “महिला आरक्षण: बदलते परिप्रेक्ष्य और भविष्य की दिशा” विषय पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, न्यायविदों और सामाजिक चिंतकों ने भाग लेकर नारी शक्ति के सशक्तिकरण और राजनीति में उनकी भागीदारी पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
चर्चा का वैचारिक पक्ष और आधार
कार्यक्रम का शुभारंभ और समारोप जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की सुप्रसिद्ध प्रोफेसर आयुषी केतकर द्वारा किया गया। अपने प्रारंभिक संबोधन में प्रोफेसर केतकर ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला आरक्षण केवल सीटों का बँटवारा नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक जड़ों को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” केवल एक कानून नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है, जहाँ स्त्री को निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा माना गया है।
समारोप भाषण में प्रोफेसर केतकर ने चर्चा के निष्कर्षों को संकलित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब महिलाओं के नेतृत्व को केवल ‘प्रतीकात्मक’ न मानकर ‘प्रभावी’ माना जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों के साथ-साथ विधायी आरक्षण महिलाओं को नीति-निर्माण के केंद्र में लाने का सबसे सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।
विद्वानों का चिंतन और सक्रिय योगदान
चर्चा में जिज्ञासा संगठन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। विद्वानों का मत था कि महिला आरक्षण से जमीनी स्तर पर नेतृत्व का विकास होगा। परिचर्चा के दौरान इस पहलू पर भी गहराई से चिंतन किया गया कि कैसे यह आरक्षण सामाजिक संरचना में व्याप्त लैंगिक असमानता को दूर करने में सहायक होगा। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं की सफल भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे कठिन निर्णय लेने और शासन चलाने में पूर्णतः सक्षम हैं।
प्रोफेसर राजकुमार भाटिया का मार्गदर्शन
‘जिज्ञासा’ के संस्थापक और वरिष्ठ विचारक प्रोफेसर राजकुमार भाटिया जी ने इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘जिज्ञासा’ का उद्देश्य समाज के बौद्धिक वर्ग को ऐसे विषयों पर सक्रिय करना है जो राष्ट्र के भविष्य को प्रभावित करते हैं। प्रोफेसर भाटिया ने आह्वान किया कि हमें आरक्षण के क्रियान्वयन के साथ-साथ समाज की मानसिकता में भी व्यापक परिवर्तन लाने के लिए कार्य करना होगा।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा के महासचिव श्री सतीश मिनोचा जी ने सभी वक्ताओं और आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा निरंतर ऐसे विषयों पर विमर्श का मंच प्रदान करती रहेगी जो समाज के प्रबुद्ध वर्ग को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हैं। उन्होंने एकात्म मानव भवन में हुए इस आयोजन की सफलता के लिए सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और विभिन्न शोध संस्थानों के प्रोफेसरों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने एक स्वर में माना कि महिला आरक्षण भारत के “अमृत काल” में एक नए युग की शुरुआत है।

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