The Biharijanseva : संस्कृत भाषा के पुनरुत्थान और वैश्विक प्रसार में अग्रणी संस्था संस्कृत भारती के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय भवन ‘प्रणव’ का भव्य उद्घाटन सोमवार को किया जाएगा। राजधानी नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित इस अत्याधुनिक भवन का लोकार्पण डॉ. मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करकमलों द्वारा संपन्न होगा।
यह भवन आने वाले समय में संस्कृत के प्रचार-प्रसार, शोध एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होने जा रहा है।
वैदिक ऋचाओं के मध्य तीन दिवसीय अनुष्ठान प्रारंभ
उद्घाटन से पूर्व शनिवार को तीन दिवसीय वैदिक अनुष्ठान का विधिवत् शुभारंभ किया गया। संपूर्ण परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान हो उठा। देशभर से पधारे लगभग 100 विद्वान आचार्यों ने सामूहिक रूप से वेदपाठ किया। आचार्य सुधीर, प्रो. रामराज उपाध्याय एवं प्रो. परमानंद भारद्वाज के सानिध्य में वास्तु पूजन, मंडल रचना, कलश स्थापना एवं नवग्रह शांति जैसे शास्त्रीय विधान सम्पन्न कराए जा रहे हैं। इस अवसर पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय एवं दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष डॉ. वागीश भट्ट ने सपत्नीक मुख्य यजमान के रूप में पूजा-अर्चना संपन्न की।
प्रणव’ बनेगा संस्कृत के वैश्विक विस्तार का केंद्र
इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन ने कहा कि ‘प्रणव’ भवन संस्कृत भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार का संकल्प केंद्र सिद्ध होगा। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक सशक्त रूप से पहुँचाने का कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संस्कृत शिक्षण, डिजिटल माध्यमों के जरिए भाषा प्रसार तथा प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है ‘प्रणव’ भवन
संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीशदेव पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘प्रणव’ कार्यालय भवन का निर्माण आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है, जिससे संगठन की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस अवसर पर भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री, संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के निदेशक प्रो.चांदकिरण सलूजा, संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री जयप्रकाश गौतम, महामंत्री सत्यनारायण भट्ट, न्यास सदस्य दिनेश कामत, व्यवस्था प्रमुख डॉ. देवकीनंदन शर्मा, डॉ. संजीव राय, सहित अनेक विद्वान एवं गणमान्य उपस्थित रहे।
देशभर से जुटेंगे प्रतिनिधि
सोमवार को आयोजित मुख्य उद्घाटन समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिनिधि, शिक्षाविद् एवं संस्कृत प्रेमी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। यह आयोजन संस्कृत के नवजागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

