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The Biharijanseva – NEET UG 2026 महासंकट: सीकर से देहरादून तक फैला ‘पेपर लीक’ का जाल

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नितिन गुप्ता/प्रणव कुमार

The Biharijanseva : देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्ष NEET UG 2026 एक बार फिर बड़े विवादों की आग में झुलस रही है परीक्षा के आयोजन के साथ ही एक कथित ‘गेस पेपर’ के व्यापक प्रसार और पेपर लीक के दावों ने देशभर के 22 लाख से अधिक परीक्षार्थियों उनके अभिभावकों और समूचे कोचिंग उद्योग में हड़कंप मचा दिया है राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए गहराई से जांच कर रही है
राजस्थान का शिक्षा केंद्र कहा जाने वाला सीकर जिला इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक का यह नेटवर्क सीकर से संचालित होकर राजस्थान के चूरू और झुंझुनू जैसे जिलों से होता हुआ उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक फैला हुआ था इस साजिश के केंद्र में राकेश मंडावरिया का नाम प्रमुखता से आया है जो सीकर के पिपराली रोड पर ‘एसके कंसल्टेंसी’ नामक संस्थान चलाता है संदेह है कि इसी संस्थान के माध्यम से प्रश्न बैंक को छात्रों और कोचिंग सर्किलों के बीच डिजिटल और प्रिंटेड रूप में प्रसारित किया गया था सूत्रों का दावा है कि मंडावरिया के पास यह संदिग्ध सामग्री अप्रैल के महीने में ही पहुँच चुकी थी। SOG की जांच के सबसे चौंकाने वाले खुलासे के अनुसार, पुलिस का ध्यान वर्तमान में एक 410 सवालों वाले गेस पेपर पर है आरोप है कि इस गेस पेपर के करीब 120 सवाल असली NEET परीक्षा के प्रश्न पत्र से हूबहू मिलते-जुलते थे विशेषकर बायोलॉजी और केमिस्ट्री के खंडों में ‘स्ट्राइकिंग सिमिलैरिटी’ यानी असाधारण समानता देखी गई है विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी छात्र ने इस गेस पेपर को हल किया होता, तो उसे परीक्षा में 600 अंकों तक का सीधा लाभ मिल सकता था जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ाई से पुष्टि कर रही हैं कि क्या यह केवल एक संयोग था या फिर किसी गहरी साजिश के तहत असली सवाल पहले ही बाहर कर दिए गए थे‌ NEET यूजी पेपर का प्रसार व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम के निजी चैनलों के जरिए बिजली की रफ्तार से हुआ जांच के दौरान केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे सीकर के एक छात्र का नाम भी सामने आया है, जिसे यह पीडीएफ भेजी गई थी इस गोरखधंधे में पैसों का बड़ा खेल भी उजागर हुआ है रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षा से दो दिन पहले इस पेपर की कीमत 5 लाख रुपये तक वसूली जा रही थी जो परीक्षा के बिल्कुल नजदीक आने पर घटकर 30,000 रुपये तक पहुँच गई थी यह कीमतों का उतार-चढ़ाव एक संगठित अपराध जगत की कार्यप्रणाली की ओर संकेत करता है
विवाद के तूल पकड़ने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपना रुख स्पष्ट किया है एजेंसी का दावा है कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा के सभी आधुनिक प्रोटोकॉल का पालन किया गया था जिसमें GPS ट्रैकिंग वाले वाहन यूनिक वॉटरमार्क, AI आधारित CCTV निगरानी और 5G जैमर शामिल थे NTA ने स्वीकार किया है कि उन्हें 7 मई को गड़बड़ी की कुछ शिकायतें मिली थीं जिन्हें तुरंत केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेज दिया गया है फिलहाल इस मामले में 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है ‌ तथा इस पेपर लीक के मुद्दे को सुलझाने के लिए सीबीआई जांच लगी हुई है और जांच की परतें खुलने के बाद ही परीक्षा की निष्पक्षता पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा

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