The Biharijanseva : नई दिल्ली, 13 मई 2026: देश के प्रतिष्ठित विद्वानों और विचारकों के प्रमुख संगठन ‘जिज्ञासा’ का स्थापना दिवस समारोह आज कॉन्स्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘दसवें स्थापना दिवस व्याख्यान’ का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका, शिक्षा और मीडिया जगत की शीर्ष हस्तियों ने हिस्सा लिया।राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के अध्यक्ष और देश के अटॉर्नी जनरल श्री आर. वेंकटरमणी ने समसामयिक कानूनी और संवैधानिक विषयों पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “वर्तमान न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक बहस की अत्यंत आवश्यकता है। मुझे बेहद खुशी है कि ‘जिज्ञासा’ फोरम ने इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की शुरुआत की है।” उन्होंने बौद्धिक विमर्श के इस मंच को समय की मांग बताया।न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए उसका देश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना आवश्यक है।वर्तमान न्यायिक प्रणाली में गहरे सुधारों की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारी न्याय व्यवस्था में व्याप्त दोष और विसंगतियां तभी दूर हो सकती हैं, जब हमारी न्याय व्यवस्था भारत की अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ेगी। भारतीय संस्कृति में न्याय लोक-कल्याण और सत्य पर आधारित है, जिसे आधुनिक व्यवस्था में आत्मसात करना अनिवार्य है।”जस्टिस गोयल ने न्यायिक सुधारों की सुस्त रफ्तार पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता के 78 वर्षों के बाद भी आवश्यक बुनियादी बदलाव नहीं हो पाए हैं। न्याय अभी भी आम आदमी के लिए बेहद महंगा है और बहुत देरी से मिलता है। उन्होंने आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक केस लंबित पड़े हैं। कानून आयोग की सिफारिशों को सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बावजूद उन पर ठोस काम नहीं हो सका।जिज्ञासा के 10 वर्षों की यात्रासंस्था के चेयरमैन श्री राजकुमार भाटिया ने फोरम की पिछले एक दशक की प्रगति रिपोर्ट साझा की। उन्होंने बताया कि यह संगठन का 10वां स्थापना दिवस व्याख्यान है। इस मंच से देश के विकास और नीति-निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार प्रबुद्ध व्याख्यान आयोजित होते रहे हैं।शीर्ष नेतृत्व का बौद्धिक विमर्शइस अवसर पर असम के पूर्व राज्यपाल श्री जगदीश मुखी, मध्य प्रदेश खाद्य आयोग (भोपाल) के चेयरमैन प्रो. वी. के. मल्होत्रा और दिल्ली की पूर्व महापौर श्रीमती मीरा अग्रवाल, के एन गोविंदाचार्य जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इनके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक प्रोफेसरों, वरिष्ठ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने परिचर्चा में भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन मुनीश जी द्वारा दिया गया।

