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कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व: दत्तात्रेय होसबाले

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करुणा नयन चतुर्वेदी/ प्रेम कुमार

The Biharijanseva : नई दिल्ली, 10 मई। छात्र कल्याण न्यास एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में अभाविप के संगठन शिल्पी प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर प्रिय केलकर जी विषय पर विशेष अभिवाचन प्रस्तुति कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट स्थिति के रूप में फिर भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. रघुराज किशोर तिवारी और पूर्व अध्यक्ष प्रा. राजकुमार भाटिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया को पूरे राष्ट्र में समर्थन प्राप्त है जिसके प्रणेता यशवंतराव केलकर जी थे। इसके विकासक्रम में यशवंतराव की महत्ती भूमिका थी। उन्होंने कहा कि स्वयं को पीछे रखकर युवा शक्ति को आगे बढ़ाने की संकल्पना यशवंतराव के विचार से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में आया है। यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व काफी विराट था। उनसे जब भी कोई मिलता तो कुछ ना कुछ सीखता ही था। यशवंतराव केलकर अपने कार्य पद्धति से कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय थे और वह प्रत्येक कार्यकर्ताओं को मौका देते थे। उन्हें आगे बढ़ाने में उनकी मदद करते थे। वह कहते थे कि शरीर को डिटॉक्स करने से पहले मन को डिटॉक्स करने की जरूरत है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की एक परंपरा में एक परवाह की जो स्थापना उन्होंने कि वह आज भी कायम है। रघुराज किशोर कहा कि वर्तमान पीढ़ी को यह कार्य पद्धति यशवंतराव से ही विरासत में मिली है। यशवंतराव केलकर से प्राप्त प्रेरणा बिंदुओं से पुराने और वर्तमान को अवगत कराया जाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ने का काम संभव हो सके। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर व्यक्ति अपने जीवन क्षेत्र में जहां भी जाते हैं, वहीं अपना सर्वस्व देते हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार भाटिया में कहा कि यदि कोई सचमुच में यशवंत राव केलकर के जीवन वृतांत को जानना चाहता है तो पहले उन्हें पढ़ें। उनके कार्य पद्धति को सीखने से पहले उनके ऊपर आधारित लेखों और पुस्तकों से होकर गुजरना चाहिए। तभी आप यशवंत राव केलकर के विराट व्यक्तित्व को जान सकेंगे। भाटिया ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में एक खास पद्धति को विकसित करने में यशवंतराव केलकर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यशवंतराव खेलकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन शिल्पी थे।वह भले ही इसके संस्थापक ना रहे हों लेकिन उन्होंने इस संगठन को नई रूप में ढालने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वह कहते थे कि विद्यार्थी परिषद से मिले दृष्टिकोण को जीवन में जीने के लिए प्रयोग करना चाहिए । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल विद्यार्थियों के लिए कार्य नहीं करती बल्कि यह एक ऐसी भावी नागरिक को तैयार करने की फैक्ट्री है जो भविष्य में जिस भी जगह रहेंगे वहां पर ही भारतीयता को प्रमुखता से रखते हुए जीवन का निर्वाह करेंगे। उनका मानना था कि कार्यकर्ता जीवन के जिस क्षेत्र में भी जाएगा वहीं अपना मुकाम हासिल कर लेगा। यशवंतराव केलकर कार्यकर्ताओं में विश्वास रखते थे। वह मनुष्य को गुण दोष के आधार पर नहीं नापते थे। उनका मत था कि कार्यकर्ताओं को गुण दोष के सहित स्वीकार करना चाहिए और उसके सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। केलकर ऐसे महान पुरुष थे जिन्हें जितना पढ़ा जाएगा उतना जाना जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने उद्बोधन में कहा कि आजकल के कार्यकर्ताओं को अभ्यास वर्ग में जो भाव प्रदर्शित किए जाते हैं वह यशवंतराव केलकर की देन है। यशवंतराव केलकर के जन्म शताब्दी वर्ष में यह आयोजन काफी पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। यशवंतराव केलकर को पुनः मानस पटल पर लाने का यह स्वर्णिम अवसर आज हम सभी को मिला है। उन्होंने कहा कि यशवंतराव केलकर के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है । यशवंतराव केलकर ही पहले व्यक्ति थे जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में महिला सहभागिता, छात्र उपयोगिता के बिंदुओं पर कार्य करने के लिए आगे आए। उनका जीवन तमाम कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श का प्रतिमान है। दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि छात्र आंदोलन के सिद्धांत को कैसे कार्य करना चाहिए यह यशवंतराव केलकर के व्यक्तित्व से पता चलता है। वह अपने विद्यार्थियों में विश्वास रखते थे। वह अपने व्यक्तिगत जीवन में लोगों को अनुभव करने के लिए छोटी-छोटी यात्राएं करते थे। वह कभी भी अपने विद्यार्थियों को ही दृष्टि से नहीं देखते थे। उनका मानना था कि विद्यार्थी कभी भी छोटा या बड़ा नहीं होता। उनका अपना यह तर्क था कि व्यक्ति को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए ना कि उसे दूसरों पर थोपना चाहिए। वह कहते थे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से प्राप्त गुण को लेकर कार्यकर्ता जब सामाजिक जीवन और राजनीतिक जीवन में जाकर के रूप में रहेंगे तो वह समाज के उत्थान के लिए अपनी आहुति देंगे। उनका चरित्र काफी विराट है और उन्हें समझाने के लिए अध्ययन चिंतन और मनन की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती यशवंत राव केलकर और विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीपक शंकर के हुआ। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह लेकर किया गया। इस अवसर पर मिलिंद भंगी ने अपने मराठी से हिंदी में रूपांतरित यशवंत राव केलकर के ऊपर अभिवाचन प्रस्तुति प्रदर्शित की इस प्रस्तुति के अंदर यशवंतराव केलकर के जीवन वृतांत को बेहद सुंदर और आकर्षक ढंग से सैंड आर्ट के जरिए दिखाया गया है। अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मित्रविंदा करनवाल ने किया।

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