नई दिल्ली, 11 फरवरी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली एवं संस्कृत भारती, दिल्ली प्रान्त के संयुक्त तत्त्वावधान में दस दिवसीय, 06 संस्कृत-सम्भाषण शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के 300 छात्रों ने प्रतिभाग किया। 31 जनवरी 2026 से प्रारम्भ हुए इन शिविरों का समापन 10 फ़रवरी 2026 को गरिमामय समारोह के साथ सम्पन्न हुआ।
इस पहल ने यह सिद्ध किया कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ भारतीय भाषिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का समन्वय पूर्णतः संभव है।
इन शिविरों का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि जागृत करने के साथ तनाव मुक्त होकर खेल खेल में कैसे अध्ययन कराना तथा संस्कृत को दैनिक जीवन की संवाद-भाषा के रूप में स्थापित करना था। शिविरों में प्रतिभागियों को सरल, व्यवहारिक एवं संवादात्मक पद्धति से संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अल्प समय में ही संस्कृत में आत्मविश्वासपूर्वक संवाद करने लगे।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. श्रीदेवी उपाध्यायुला (अध्यक्षा, बी.एस.डब्ल्यू., IIT दिल्ली) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. देवकीनन्दन (प्रान्त कार्यालय एवं कोश प्रमुख, संस्कृत भारती, दिल्ली) रहे। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जेम्स गोम्स (विभागाध्यक्ष – एन.आर.सी.वी.ई.ई. (NRCVEE) प्रोफेसर, स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज, सारस्वत अतिथि डॉ. वागीश भट्ट (प्रान्ताध्यक्ष, संस्कृत भारती, दिल्ली) पधारे
आयोजन के संयोजक प्रो. नोमेश बोलिया (भारतीय ज्ञान-परम्परा प्रकोष्ठ, IIT दिल्ली) ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में प्रो. नोमेश बोलिया ने कहा कि इस प्रकार के शिविर IIT जैसे तकनीकी संस्थान के विद्यार्थियों के लिए केवल भाषा-अधिगम का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, तर्कशक्ति, स्मरण-क्षमता एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा से जुड़ने का सशक्त साधन हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. देवकीनन्दन ने संस्कृत भारती के कार्यों एवं उसके बहुआयामी योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत भारती केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक एवं भाषिक आंदोलन है, जिसका लक्ष्य “संस्कृतं सर्वजनभाषा” के आदर्श को साकार करना है। उन्होंने पत्राचार एवं अन्य माध्यमों से संस्कृत अध्ययन की सुविधाओं का उल्लेख करते हुए संस्था के विविध प्रकल्पों—संस्कृत-सम्भाषण शिविर, बालकेंद्र, भाषाबोधन वर्ग , प्रशिक्षण वर्ग आदि के संस्कृत बोलना सीखना, संस्कृत-ग्राम निर्माण तथा डिजिटल माध्यमों से प्रचार की जानकारी दी।
सारस्वत अतिथि डॉ. वागीश भट्ट (प्रान्ताध्यक्ष, संस्कृत भारती, दिल्ली) ने कहा कि संस्कृत भारती का प्रयास केवल भाषा-शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा, नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना एवं आत्मबोध को समाज में पुनर्स्थापित करने का सतत प्रयास है। IIT दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान के साथ यह सहयोग संस्कृत और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का प्रेरक उदाहरण है।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जेम्स गोम्स ने बताया कि संस्कृत का संरचनात्मक एवं वैज्ञानिक स्वरूप विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता को सुदृढ़ करता है तथा प्राचीन भारतीय ग्रंथों में निहित गणित, विज्ञान, दर्शन और तकनीकी अवधारणाओं को समझने में सहायक सिद्ध होता है। इस शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों में सांस्कृतिक आत्मगौरव एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जागरूकता का भी विकास हुआ है।
समापन सत्र में प्रतिभागियों ने संस्कृत में संवाद प्रस्तुत कर अपनी प्रगति का परिचय दिया तथा शिविर से प्राप्त अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण ने न केवल उनकी भाषिक दक्षता बढ़ाई, बल्कि आत्मविश्वास एवं सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सुदृढ़ किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षकों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

