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जेएनयू में ऑपरेशन सिन्दूर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठि का हुआ आयोजन

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नई दिल्ली, 25 मार्च। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के केंद्र ने ऑपरेशन सिन्दूर : आधुनिक युद्ध के उभरते आयाम विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मई 2025 की ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाइयों के बाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति में रणनीतिक बदलाव को लेकर प्रख्यात शिक्षाविदों व सैन्य विशेषज्ञों ने बौद्धिक विमर्श किया।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि वीआईएफ के निदेशक और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. अरविंद गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं, एक दूसरे के सहयोगी है। उन्होंने कहा की युद्ध के कोई नियम नहीं माहौल पर निर्भर करता है। उन्होनें जेएनयू जैसे संस्थानों से विश्व-स्तरीय शोध करने का आग्रह किया।
एससीएनएसएस की अध्यक्ष प्रो. उम्मू सलमा ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के लिए रणनीतिक मोड़ बताया।
नैरेटिव बिल्डिंग और तकनीकी संप्रभुता के विषय में एससीएनएसएस के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार दुबे ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का कर्तव्य है कि वे देश के लिए मज़बूत राष्ट्रीय विमर्श तैयार करें।

सेवानिवृत्त कैप्टन सरबजीत एस. परमार ने ऑपरेशन के दौरान नौसेना द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने ऑपरेशन में मिली तकनीकी सफलता का श्रेय आत्मनिर्भर भारत को दिया, जिसने युद्ध का रुख ही बदल दिया।

कैप्टन स्वयम प्रकाश सिंह ने कहा कि वायु शक्ति और अंतरिक्ष आज आधुनिक युद्ध के दो मुख्य आयाम बन गए हैं, जिनका विस्तार हुआ है। प्रो. आई. एम. झा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सैन्य बुद्धिमत्ता का एक शानदार उदाहरण था। यह इस बात का प्रमाण है कि शांति का मार्ग शक्ति के माध्यम से ही प्रशस्त होता है।

डॉ. लक्ष्मण बेहरा ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए अनुसंधान और विकास पर बजट बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।

तकनीकी के बहुआयामी पक्ष पर लगभग 60 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
प्रो. मनमोहिनी कौल ने भारतीय सुरक्षा में न्यू नॉर्मल कि चर्चा की।
सेवानिवृत्त मेजर जनरल बिपिन बख्शी ने रणनीतिक संयम से हटकर त्वरित प्रतिक्रिया को अपनाने को लेकर विस्तार से चर्चा किया। उन्होंने कहा कि अब सक्रिय रूप से बहु-आयामी सैन्य अभियान चलाने होंगे।

मेजर जनरल ध्रुव सी. कटोच ने कहा कि आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करके एक कड़ा संदेश पाकिस्तान को दिया और इसे लगातार दोहराते रहने की वकालत की एवं इसे मोदी सिद्धांत के रूप में स्थापित करने की वकालत की एवं मोदी के नेतृत्व कुशलता की सराहना की।
रोशनी सेनगुप्ता और चांदनी सेनगुप्ता ने इस ऑपरेशन को एक सभ्यतागत दावा बताया, जिसमें भारत भले ही एक अनिच्छुक आक्रामक रहा हो लेकिन अब एक मजबूत जवाबी कार्रवाई करने वाला देश बन गया है।

मेजर जनरल रवि मुरुगन ने कहा कि कैसे टेक्नोलॉजी ने युद्ध के पूरे तंत्र को बदल दिया है।
अंत में भारत की सुरक्षा संरचना का भविष्य पर बात करते हुए सेवानिवित्त आईपीएस अधिकारी व सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य श्री अवधेश माथुर ने कहा कि पाकिस्तानी समाज में वहां की सेना उनके राजनीतिक, आर्थिक तंत्र को नियंत्रित करती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना भारत के खिलाफ आक्रामक गतिविधियां जारी रखेगी, जिसका मुँहतोड़ ज़वाब लगतार भारत देता रहेगा और जब तक पाकिस्तान की कमर नहीं टूट जाती तब तक शांत नहीं बैठेगा। इस गोष्ठी के संयोजक व एससीएनएसएस एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया।

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