बोधगया । मगध विश्वविद्यालय में आज 6 फरवरी 2026 को ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का आयोजन स्नातकोत्तर अंग्रेज़ी विभाग एवं एनईपी सेल द्वारा, आईक्यूएसी के तत्वावधान में तथा भारतीय भाषा समिति (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) के सहयोग से किया गया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने धार्मिक विविधताओं की भाँति भाषाई विविधता को भारत की विशिष्ट परंपरा बताया और कहा कि स्थानीय भाषाएँ देश को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा भारत की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखती हैं। उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण सम्मेलन की स्थानीय समन्वयक, डीन, मानविकी संकाय एवं अंग्रेज़ी विभाग की प्रोफेसर प्रो. निभा सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन, कुलगीत तथा अतिथियों के सम्मान के उपरांत उद्घाटन भाषण संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. मुकेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
सम्मेलन के दौरान ई-स्मारिका का लोकार्पण किया गया। इसी क्रम में ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषय पर आधारित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों— Insights from Bharatiya Bhasha Pariwar: A Framework in Linguistics तथा Collected Studies on Bharatiya Bhasha Pariwar: Perspectives and Horizons—का औपचारिक विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त प्रो. निभा सिंह (अंग्रेज़ी विभाग) द्वारा संपादित पुस्तक Language, Ecology and Literature का भी लोकार्पण किया गया। सम्मेलन के द्वितीय सत्र में एक प्लिनरी सत्र का आयोजन किया गया । इस सत्र में प्रमुख वक्ताओं के रूप में डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, प्रोफेसर, भाषाविज्ञान विभाग, नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (NEHU), शिलांग ने अपने वक्तव्य में विविध उदाहरणों के माध्यम से भारतीय भाषाओं की व्यापकता, महत्ता एवं सहजता को रेखांकित किया तथा भारतीय भाषा परिवार की संकल्पना को बौद्धिक स्वराज की पुनर्स्थापना से जोड़ा। वहीं डॉ. मेंडेम बापूजी, सहायक प्रोफेसर, लिंग्विस्टिक रिसर्च यूनिट, भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई), कोलकाता ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक की भाषाओं में निहित संरचनात्मक समानताओं पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त डॉ. रवि रंजन कुमार, भूविज्ञान विभाग, NEHU, शिलांग ने भारतीय भाषा परंपरा में सतत् जल प्रबंधन से जुड़े आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने सम्मेलन में सहभागिता की। सम्मेलन के अंतर्गत कुल छह समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भारतीय भाषा परिवार, भाषाई एकता, बहुभाषावाद, भारतीय ज्ञान प्रणाली, भाषाई संस्कृति, सभ्यतागत पहचान तथा नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मातृभाषा आधारित शिक्षा जैसे विषयों पर गहन अकादमिक विमर्श हुआ।
सम्मेलन का समापन अपराह्न में आयोजित समापन सत्र के साथ हुआ, जिसकी अध्यक्षता मगध विश्वविद्यालय के माननीय प्रो-कुलपति प्रो. बी. आर. के. सिन्हा ने की। समापन सत्र में सम्मेलन प्रतिवेदन का प्रस्तुतीकरण डॉ. अमृतेंदु, सम्मेलन के स्थानीय समन्वयक एवं वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर, अंग्रेज़ी विभाग, ए.एम. कॉलेज, गया द्वारा किया गया। इसके पश्चात सम्मेलन की स्थानीय समन्वयक एवं एनईपी समन्वयक डॉ. प्रियंका सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन के संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से डॉ. मीनाक्षी प्रसाद एवं डॉ. ममता मेहरा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

