
नई दिल्ली: संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को विपक्ष द्वारा ‘Poor Lady’ कहे जाने पर राजनीतिक बवाल मच गया है। इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और इसे संवैधानिक पद का अपमान करार दिया। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इस बयान की कड़ी आलोचना की और कांग्रेस पर आदिवासी समाज और महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।source -sansad tv
रविशंकर प्रसाद का कांग्रेस पर तीखा हमला
लोकसभा में चर्चा के दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा, “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं। उन्हें ‘Poor Lady’ कहना कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना सीखना चाहिए।” उन्होंने कहा कि “कांग्रेस का इतिहास संवैधानिक पदों का अपमान करने का रहा है। जब एक आदिवासी महिला इस देश के सर्वोच्च पद पर बैठी हैं, तो उन्हें ‘Poor Lady’ कहना घोर अपमानजनक है।”
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के इस बयान को नस्लीय और महिला विरोधी मानसिकता करार देते हुए कहा कि “कांग्रेस हमेशा गरीबों और वंचित वर्गों को नीचा दिखाने की कोशिश करती है। देश की जनता इस सोच को स्वीकार नहीं करेगी।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग खुद को संविधान का रक्षक बताते हैं, उन्हें पहले राष्ट्रपति पद का सम्मान करना सीखना चाहिए।”
भाजपा ने कांग्रेस से मांगी माफी
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस बयान पर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। भाजपा ने कहा कि “राष्ट्रपति मुर्मू सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतंत्र की प्रतीक हैं। विपक्ष का यह बयान केवल राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान है।”
कांग्रेस का रुख और संसद में हंगामा
वहीं, कांग्रेस ने अपने बचाव में कहा कि उनकी मंशा राष्ट्रपति का अपमान करने की नहीं थी। हालांकि, भाजपा सांसदों ने इस बयान पर जमकर विरोध जताया और संसद में हंगामा किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण और माफी की मांग करते हुए कहा कि “इस तरह की बयानबाजी लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है।”
संवैधानिक पदों के अपमान पर पुराना विवाद
भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के इतिहास को भी कठघरे में खड़ा किया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि “संवैधानिक पदों के अपमान की यह कोई पहली घटना नहीं है। कांग्रेस का इतिहास ऐसे बयानों से भरा पड़ा है। इन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति जैसे पदों का अनादर किया है।”
उन्होंने नेहरू युग का जिक्र करते हुए कहा कि “जब भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अंतिम संस्कार हुआ था, तब नेहरू ने उनके अंतिम संस्कार की उपेक्षा कर दी थी और राजस्थान में कांग्रेस की फंडिंग के लिए चले गए थे। यह कांग्रेस की सोच को दर्शाता है।”
