मिथिला विश्वविद्यालय के वीमेन्स सेल द्वारा ‘अधिकार, न्याय और सक्रियता : सभी महिलाओं एवं लड़कियों’ पर जागरूकता एवं विशेष व्याख्यान आयोजन
महिला सशक्तिकरण केवल हमारी नैतिकता एवं सामाजिकता के लिए ही आवश्यक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण एवं समाज की खुशहाली के लिए भी अनिवार्य है। यद्यपि इसका रास्ता कठिन है, फिर भी महिलाओं को आगे चलना ही पड़ेगा। इसके लिए सुनना, समझना और उसपर अमल करना जरूरी है। सिर्फ सरकारी कानून एवं पुलिस के बल पर ही नहीं, बल्कि हमें सुयोग्य बनकर संघर्ष भी करना होगा, तभी सामाजिक परिवर्तन संभव है। उक्त बातें मगध विश्वविद्यालय, गया की पूर्व कुलपति प्रो कुसुम कुमारी ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के वीमेन्स सेल के तत्वावधान में हाइब्रिड मोड में जुबिली हॉल एवं पीजी वाणिज्य विभाग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यूनेस्को के थीम- “अधिकार, न्याय और सक्रियता : सभी महिलाओं एवं लड़कियों” पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम एवं विशेष व्याख्यान को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। कहा कि मिथिला भारती-मंडन मिश्र आदि की पवित्र धरती है, जहां आकर काफी प्रसन्नता हो रही है। अनेक क्षेत्रों में महिलाएं आगे आ रही हैं, फिर भी समाज भेदभावपूर्ण है। स्त्री किसी मामले में पुरुष से कमतर नहीं है। स्त्री पुरुष एक-दूसरे के पूरक और निर्भर हैं। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी से आग्रह किया कि इस विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन केन्द्र प्रारंभ करें। मैं सिलेबस निर्माण आदि में पूरी तरह मदद करूंगी।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने इस आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम आयोजन की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय महिला कोषांग को जिम्मेदारी दी कि वे महिलाओं के सम्मान के लिए विशेष पाग का डिजाइन करें। पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो मंजू राय ने सम्मानित अतिथि के रूप में कहा कि महिलाएं खुद अपनी हक के लिए आवाज़ उठाएं। माता-पिता भी पुत्र मोह से बाहर निकाल कर बच्चे- बच्चियों को समान मानते हुए शिक्षा और सुविधाएं दें। पुरुषवादी सोच को बदलने की जरूरत है, तभी महिलाएं साधिकार, सम्मान एवं न्याय पूर्वक रह पाएंगे। कहा कि पुत्र- पुत्री में समानता एवं सम्मान का अधिकार हमें अपने घर से शुरू करनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो पुनीता झा ने कहा कि महिला राष्ट्र निर्माण की शिल्पी होती हैं। अभी भी नारी समानता व्यावहारिक रूप नहीं लिया है, जिसके लिए और प्रयास जरूरी है। कहा कि हालांकि आज महिलाएं सभी क्षेत्रों में बहुत कुछ कर रही हैं, फिर भी उन्हें अपने अधिकारों को समझते हुए आगे बढ़ना होगा।
महिला सेल की सदस्य डॉ निर्मला कुशवाहा ने आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नारी सशक्तिकरण की प्रेरक मुख्य अतिथि प्रो कुसुम कुमारी का श्रोताओं से विस्तृत परिचय कराया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत एवं सामाजिक बुराइयों पर आधारित वारिधि विशाल लिखित एवं निर्देशित एकांकी ‘कलि’ की बेहतरीन प्रस्तुति की गई, जिसे दर्शकों में खूब सराहा। अतिथियों का स्वागत वीमेन्स सेल की समन्वयक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ तनिमा कुमारी ने किया। विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्र- दामिनी, आयुषी, चंदन, चन्द्रमणि, ऋषभ, सुमन तथा चन्द्र प्रकाश ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं बुके से किया गया। समारोह में संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, पदाधिकारी, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी एवं छात्र-छात्राएं के साथ ही वीमेंस सेल की सदस्य- डॉ पारुल बनर्जी, रानी झा आदि सहित 350 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे। एनएसएस की वरीय स्वयंसेविका प्रिया कुमारी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन महिला सेल की सदस्य डॉ सोनी शर्मा ने की।



