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मानसिक शांति, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच से ही स्वस्थ जीवन संभव

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अंशु कुमार/रिंशु यादव
नई दिल्ली, 16 मार्च। नई दिल्ली में पल्स ऑफ पॉजिटिविटी हेल्थ एंड वेलनेस 2026 कार्यक्रम 16 मार्च को आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य, वेलनेस और सकारात्मक जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के तेज़ जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन का उद्देश्य लोगों को बेहतर और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य प्रतिष्ठा ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए हॉलिस्टिक हेल्थ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए सबसे पहले अपने शरीर से प्रेम करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारा शरीर ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है, इसलिए इसकी देखभाल करना और इसे सम्मान देना बहुत जरूरी है। आचार्य प्रतिष्ठा ने लोगों को जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि खुलकर हंसना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। उनके अनुसार हंसी तनाव को कम करती है और मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। उन्होंने सभी से संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजा इकबाल सिंह, मेयर एमसीडी दिल्ली ने अपने संबोधन में सकारात्मक सोच और संतुलित जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में हमारी कई अपेक्षाएं होती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि हर अपेक्षा पूरी हो। ऐसे में जो अपेक्षाएं पूरी हो जाती हैं, उनमें संतोष और खुशी ढूंढना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतुष्टि और सकारात्मक सोच ही स्वस्थ और खुशहाल जीवन की कुंजी है। राजा इकबाल सिंह ने लोगों को तनाव से दूर रहकर संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानसिक शांति और संतोष व्यक्ति को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में “हेल्थ चौपाल” का अनावरण किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इस सत्र में मेंटल हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. गौतम चौबे, श्री रकीब अली, डॉ. सरोज दुबे और प्रो. एम.एन. होडा ने पैनल चर्चा में भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के सोशल मीडिया के दौर में मानसिक स्वास्थ्य का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि लगातार डिजिटल जुड़ाव के कारण तनाव और भावनात्मक दबाव बढ़ता है। पैनलिस्टों ने सुझाव दिया कि सकारात्मक सोच, सीमित सोशल मीडिया उपयोग, ध्यान और संवाद जैसी छोटी-छोटी आदतों से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में “Lifestyle Disease and Preventive Healthcare” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में डॉ. अंबिका धीमन, डॉ. विवेक कुमार, राजदीप सिंह आनंद और डॉ. शैलेंद्र व्यास ने पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि आज के समय में बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों का मुख्य कारण हमारी बदलती दिनचर्या और असंतुलित जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि यदि हमें स्वस्थ जीवन जीना है तो सबसे पहले अपने जीवन जीने के तरीके में बदलाव लाना होगा। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी बनाकर ही हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

कार्यक्रम के तृतीय सत्र में “Women’s Health, Maternal and Wellness” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें पुलकित शुक्ला, डॉ. भावना गर्ग, डॉ. प्रवीण कुमार गर्ग, डॉ. अनुमिता पाठक और योगिता सिंह ने अपने विचार साझा किए। डॉ. भावना गर्ग ने बताया कि समय के साथ महिलाओं की डाइट में काफी बदलाव आया है, इसलिए उन्हें संतुलित आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। योगिता सिंह ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों पर चर्चा की। वहीं डॉ. अनुमिता पाठक ने “भोजन ही भजन है” से शुरुआत करते हुए पीरियड, प्रेगनेंसी और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा बदलती जीवनशैली से बढ़ती बीमारियों पर चिंता व्यक्त की।

कार्यक्रम के अंत में रियर एडमिरल कपिल गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, पल्स ऑफ पॉजिटिविटी ने पूरे सम्मेलन की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने सभी सत्रों में हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं का उल्लेख करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों और आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

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