करुणा नयन चतुर्वेदी
नई दिल्ली, 31 जनवरी। 25वां भारत रंग महोत्सवन 2026 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और संस्कृति मंत्रालय भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जश्न ए बचपन में नन्हे-मुन्हे बच्चों ने पीपल और पीपल नाटक की प्रस्तुति संगीत नाट्य अकादमी के मेघदूत सभागार में की। नाटक के ग्रुप लीडर व निर्देशन सिनिग्धा और शुभम थें।
सिनिग्धा ने चाइड साइकोलॉजी के ऊपर इस नाटक को निर्मित किया है। नाटक में आज के तकनीकी दौर में गांव और शहर के बच्चों में काफी भिन्नता देखने को मिलती हैं। आज से तकरीबन दो तीन दशक पहले शहर से बच्चे छुट्टियों या गर्मियों में गांव जाते थे और अपने दादा-दादी के पास समय बिताते थे जिससे उनके अंदर ग्रामीण और शहरी परिवेश में रहने का अनुभव होता था। इस नाटक में गांव व शहरी दो सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों की बहुत सुंदर प्रस्तुति दी है। बच्चे गांवों में जाकर खेतों में खेलते, पेड़ चढ़ते, नदी में नहाते और गांव की मिट्टी, हवा, दूध-दही के स्वाद लेते थे। इस तरह वो गांव और शहर दोनों की सजी विरासत से जुड़ते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। गांव और शहर दोनों दो अलग दुनियां बन गई है। लेकिन इस नाटक में सिनिग्धा ने दोनों का दर्शन करने की जुगत लगाई है। लोगों का मानना है कि गांव के बच्चे शहर के बच्चों से ज्यादा स्वस्थ होते हैं। इस शारीरिक तंदुरुस्ती की वजह ताजी हवा, घर का जैविक खाना, दूध, सब्जियां हैं जोकि शहरों में प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। यही कारण है कि शहरों के बच्चों में प्रदूषण, जंक फूड, स्क्रीन टाइम ज्यादा, मोटापा,जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस नाटक में बाल कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय की प्रस्तुति पेश की है।
आज के दौर में जब परिवार जैसी संस्था का लोप हो रहा है। लोगों में एकलपन बढ़ती जा रही है। ऐसे में बचाने के माध्यम से समाज को जागरुक करने का यह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का सार्थक प्रयास है। इस नाटक को मंचित करने वाले बच्चों में ज्यादातर शहरी पृष्ठभूमि के हैं। ऐसे में यह एक अच्छा प्रयास है कि इन बच्चों को उस ग्रामीण और शहरी परिवेश की समझ विकसित की जाए जिससे इनके अंदर भारतीय संवेदना जीवित रह सके।
नाटक के माध्यम से बच्चों ने दर्शकों के सामने आज के समय की तमाम विषमताओं को उजागर किया। उन्होंने प्रदूषण, शहरी भागदौड़ भरी जिंदगी, ऊंच नीच के भेद को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।

दृश्य प्रस्तुति कु
