नई दिल्ली, 2 मार्च। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आज प्रशासनिक दमनकारी नीति और ‘निष्कासन राज’ के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। अभाविप कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को लगभग 5-6 घंटों तक घेरकर रखा एवं छात्र हित और जेएनयू प्रशासन के तुगलकी फरमान के विरुद्ध तीखे सवाल पूछे साथ ही छात्र-विरोधी नीतियों पर सीधा जवाब भी मांगा। परिषद ने उस दमनकारी CPO मैनुअल का विरोध किया जिसे प्रशासन ने छात्रों की आवाज़ कुचलने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। अभाविप ने स्पष्ट किया कि चीफ प्रॉक्टर ने अपने कार्यकाल में केवल अभाविप कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है और एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके ऊपर ₹5 लाख से अधिक का सामूहिक जुर्माना थोपा है। वर्तमान चीफ प्रॉक्टर का कार्यकाल जेएनयू के इतिहास में सबसे अधिक “दमनकारी” रहा है। इन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अभाविप कार्यकर्त्ताओ के करियर को बर्बाद करने के लिए निष्कासन और भारी आर्थिक दंड का सहारा लिया है।
परिषद का संघर्ष जेएनयू को एक ‘प्रशासनिक जेल’ बनने से बचाने के लिए है। प्रशासन की स्वार्थ केंद्रित नियमों ने शोधार्थियों और सामान्य छात्रों के मनोबल को तोड़ा है। अभाविप किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ का समर्थन नहीं करती और इसी बात का उदहारण देते हुए आज का यह संघर्ष एक स्वस्थ संवाद की स्थापना एवं जेएनयू प्रशासन के खिलाफ़ शांतिपूर्ण आक्रोश पर केंद्रित था। हम चीफ प्रॉक्टर और पूरे एडमिनिस्ट्रेशन को चेतावनी देते हैं कि वे अपनी ‘तानाशाही’ की सीमाएं लांघना बंद करें।
अभाविप जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि आज का यह विरोध केवल एक शुरुआत है। चीफ प्रॉक्टर ने अपने कार्यकाल को दमन का केंद्र बना दिया है। ₹5 लाख का जुर्माना और हमारे साथियों का निष्कासन प्रशासन के डर का प्रतीक है। जहाँ एक ओर जर्जर हॉस्टल और मेस की समस्याओं पर प्रशासन मौन रहता है, वहीं दूसरी ओर छात्र-हितों की बात करने वाले कार्यकर्ताओं पर लाखों का जुर्माना लगाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। हम CPO मैनुअल को कूड़ेदान में फेंकने और छात्रों को न्याय दिलाने तक चीफ प्रॉक्टर कार्यालय से पीछे नहीं हटेंगे। प्रशासन को अपनी तानाशाही का हिसाब देना ही होगा।
अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कु० पीयूष ने कहा कि प्रशासन की पक्षपाती कार्य और वामपंथी JNUSU का दोहरा चरित्र आज सबके सामने बेनकाब हो चुका है। जब हमारे कार्यकर्ताओं पर लाखों का जुर्माना लगा था, तब ये लोग प्रशासन के साथ साठगांठ कर रहे थे। हम निष्कासन और अवैध जुर्मानों के इन आदेशों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। अभाविप यह मानती है कि यह प्रशासन और वामपंथी छात्रसंघ का वही पुराना ‘अनैतिक नेक्सस’ है, जहाँ जेएनयूएसयू के नेता इन जुर्मानों पर तब तक चुप रहे जब तक वे खुद इसका शिकार नहीं हुए। चीफ प्रॉक्टर को अपनी छात्र-विरोधी कार्यशैली के लिए माफी मांगनी होगी और CPO मैनुअल को तत्काल रद्द करना होगा।


