करुणा नयन चतुर्वेदी/ अंशु कुमार
नई दिल्ली, 21 फरवरी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में आयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय रंग महोत्सव भारंगम का समापन लौहपुरुष नाटक की प्रस्तुति से हुआ। समापन समारोह में रा.ना. वि . के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, प्रख्यात रंग निर्देशक प्रो. रामगोपाल बजाज, रा.ना.वि. के उपाध्यक्ष भरत गुप्ता , प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं इस बार की रंगदूत मीता वशिष्ठ, भारतीय गीतकार , पार्श्व गायक, अभिनेता और लेखक स्वानंद किरकिरे उपस्थित रहे। इस अवसर पर ऐतिहासिक घटनाक्रम और स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष में सादर वल्लभभाई पटेल के जीवन को परिभाषित करने वाला नाटक लौहपुरुष का मंचन किया गया। इस नाटक को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने निर्देशित किया है। वहीं इसकी परिकल्पना और संगीत निर्माण की प्रक्रिया में भी उन्होंने अपना योगदान दिया है।
नाटक की पृष्ठभूमि सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द निर्मित की गई है। नाटक में सरदार पटेल के जीवन से जुड़ी सभी आयामों को शामिल किया गया है। नाटक में सरदार पटेल के जीवन संघर्ष से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में शरीक होने के साथ एक सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में बेहतरीन ढंग से दिखाने का प्रयास किया गया है। सरदार पटेल का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य योगदान रहा है। खेड़ा आंदोलन में उनकी भूमिका ने आजादी के मार्ग को प्रशस्त करने का काम किया। आजादी के बाद जूनागढ़ , हैदराबाद और जम्मू एवं कश्मीर का विलय भी भारत में उनके वजह से ही हुआ था। इसीलिए उन्हें लौहपुरुष के नाम से जाना जाता है। नाटक में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी घूमने गए बच्चों को एक इतिहास का शिक्षक सरदार पटेल के विराट व्यक्तित्व से अवगत कराते हैं। नाटक में संगीत को भी शानदार तरीके से इस्तेमाल में लाया गया है। नाटक में वस्त्र सज्जा बहुत साधारण व प्रभि थी। प्रकाश व्यवस्था भी साधारण व संगीत बहुत प्रभि थी दर्शक को स्वतंत्रता आंदोलन की याद में डुबो देने वाला ऐतिहासिन नाटक देख दर्शक भबुक थे। इस नाटक को भारत के अन्य शहरों में भी दिखाया जाना चाहिए जिससे नए लोग सरदार पटेल के विराट व्यक्ति को जाने और समझे। नाटक की प्रतुती बहुत भबुक कर देने वाला था।

